तुम्हारे न मिल पाने पर,
कल के बाद फिर कल के न आने पर,
हालात और भी बिगड़ जाने पर,
कुछ भी समझ न आने पर भी,
मैं मुस्कुराता रहूँगा।
दिल के टूट जाने पर,
साथ छूट जाने पर,
शीशा फूट जाने पर,
दौलत लुट जाने पर,
किस्मत रूठ जाने पर भी,
मैं मुस्कुराता रहूँगा।
आज फिर से नींद न आने पर,
उम्मीद बिखर जाने पर,
अवसर फिसल जाने पर,
समय निकल जाने पर भी,
फिर से दिल के बहल जाने तक,
मैं मुस्कुराता रहूँगा।
सूरज ढ़लने के बाद,
चाँद के निकलने से पहले,
दिन ढ़लने के बाद,
दिन के निकलने से पहले,
हार जाने के बाद,
हार न मानने से पहले,
पूरी ताकत से संघर्ष करते हुए,
मैं मुस्कुराता रहूँगा।
फिर एक दिन तारीख बदलेगी,
एक नई सुबह, सुबह-सुबह को निकलेगी।
इंद्रधनुष ध्वजा बनेगा,
पसीना सज्जा बनेगा।
हर दिशा सत्कार में दमकेगी,
ज़िंदगी फिर से चमकेगी।
तब से अब के अब से तब के इस दौर में,
मैं मुस्कुराता रहूँगा।
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